अभिजीत दीपके ने सीजेपी समर्थकों से मांगी माफ़ी, बॉलीवुड से भी उठीं कई आवाज़ें

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20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से माफ़ी मांगी है. उन्होंने विशेष रूप से उन लड़कियों का ज़िक्र किया, जिन्हें कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने पीटा.

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा, "मैं अपने सभी समर्थकों, ख़ासकर उन लड़कियों से माफ़ी मांगता हूं, जिन्हें पुरुष पुलिस अधिकारियों ने बेरहमी से पीटा. हम इससे बेहतर कर सकते थे. दिल्ली पुलिस की अमानवीय कार्रवाई से आपको बचाने के लिए मैं और बेहतर कर सकता था."

वहीं, एनडीए सांसदों की बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को प्रधानमंत्री के संबोधन की जानकारी दी.

किरेन रिजिजू ने कहा, "नीट परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने बताया कि गड़बड़ी की ख़बरें मिलने पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, तेरह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया."

दीपके ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ने छात्रों की मौतों का जवाब देने के बजाय एक मंत्री की रक्षा को प्राथमिकता दी.

उन्होंने लिखा, "एक धर्मेन्द्र प्रधान (जो 20 से ज़्यादा छात्रों की मौत के ज़िम्मेदार हैं) को बचाने के लिए, सरकार कई और युवा छात्रों का ख़ून बहाने के लिए तैयार थी. अगर आप घायल हुए हैं और इसे देख रहे हैं, तो मुझे डीएम करें. मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से बात करना चाहता हूं और माफ़ी मांगना चाहता हूं."

वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने एक्स पर लिखा है, ''अभिजीत की यह माफ़ी ज़रूरी थी. आंदोलन के दौरान कुछ अव्यवस्था ज़रूर रही. लेकिन इससे सीजेपी की ओर से उठाए गए अहम मुद्दों से ध्यान नहीं भटकना चाहिए. न ही दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों पर की गई कठोर कार्रवाई और स्वतंत्र भारत के सबसे अक्षम शिक्षा मंत्री का बचाव करने में लगे मीडिया की शर्मनाक भूमिका को नज़रअंदाज़ किया जाना चाहिए.''

राहुल गांधी का सरकार पर निशाना

इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए.

मीडिया से बातचीत में राहुल ने कहा, "देश के युवाओं के पास अवसर नहीं हैं, उनके लिए लगभग सभी रास्ते बंद हैं. केवल प्रतियोगी परीक्षाओं का एक रास्ता बचा था, वह भी बर्बाद हो गया है. यहां मौजूद छात्र सिर्फ़ शिक्षा व्यवस्था की शिकायत नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर आवाज़ उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि अंबानी, अडानी और आरएसएस ने शिक्षा व्यवस्था पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया है."

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर अड़ी रहेगी, राहुल ने कहा, "बिल्कुल, धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफ़ा देना ही चाहिए. लेकिन प्रदर्शनकारी युवाओं की पिटाई नहीं की जानी चाहिए, लेकिन गृह मंत्री के कहने पर ये हुई है, उन्हें भी इस्तीफ़ा देना चाहिए और प्रधानमंत्री को भी."

अभिनेता रितेश देशमुख ने अभिजीत के इस पोस्ट को शेयर किया है.

रितेश और उनकी पत्नी जेनेलिया ने लिखा, "हम अपने देश के युवाओं के साथ मज़बूती से खड़े हैं. उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए. वे हमारे लोकतंत्र की ताक़त हैं और हमारे देश के भविष्य को बनाने वाले असली लोग हैं. आइए हम उनकी बात सुनें, उनका साथ दें और उन्हें आगे बढ़ने का मौक़ा दें. हमारे युवाओं की ऊर्जा, हिम्मत और सपने उस भारत को बनाने में मदद करेंगे, जिसे हम बनाना चाहते हैं."

एक अन्य यूज़र ने लिखा, "मैं आप सभी के साथ हूं और इस आंदोलन का हर संभव तरीके से समर्थन करना चाहता हूं. जिस तरह से नए पुलिस कमिश्नर, अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे मामले को संभाला है, उससे मैं बेहद दुखी और गहरी निराशा महसूस कर रहा हूं."

अभिनेता रणवीर शौरी ने एक्स पर लिखा है, ''शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था. ऐसा होता तो सरकार अपनी साख बचा सकती थी और शायद जवाबदेह के साथ ज़िम्मेदार होने का संदेश भी दे पाती. लेकिन अब मुझे नहीं लगता कि सरकार विपक्ष को राजनीतिक बढ़त दिए बिना या अपनी स्थिति और मुश्किल किए बिना इस विवाद से आसानी से बाहर निकल पाएगी.''

लोकप्रिय लेखक चेतन भगत ने एक्स पर लिखा है, ''शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हिंसक हमलों की तस्वीरें देखकर दुख हुआ. उनकी चिंताएं वास्तविक और जायज़ हैं. शिक्षा व्यवस्था, ख़ासकर परीक्षा प्रणाली, गंभीर रूप से ख़ामियों से भरी हुई है. सख़्ती प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि इस व्यवस्था को सुधारने पर होनी चाहिए. कृपया इसका कोई बेहतर समाधान तलाशिए.''

दीपके पर भी उठे सवाल

आंदोलन में दीपके की भूमिका और सीजेपी के रवैये पर भी कुछ यूज़र्स ने सवाल भी उठाए हैं.

एक यूज़र ने लिखा, "कल पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की गई, पथराव हुआ और अराजकता फैलाने की हर संभव कोशिश की गई. फिर भी सरकार को ही दोष दिया जा रहा है."

एक अन्य टिप्पणी में कहा गया, "आपको माफ़ी मांगनी ही चाहिए. छात्रों की पिटाई आपकी वजह से हुई. आपको और आपके साथियों को पहले से पता था कि ऐसा हो सकता है, क्योंकि दिल्ली पुलिस पहले ही इस संबंध में एडवाइज़री जारी कर चुकी थी."

एक यूज़र ने लिखा, "चुप रहो! बच्चों को आगे करके पिटवाया और खुद पीछे हट गए. ऐसा करते हुए आपको शर्म नहीं आई? तुम्हारे साथियों या जिन राजनीतिक नेताओं की बात करते हो, उनमें से एक भी आगे क्यों नहीं आया? छोटी-छोटी लड़कियां पिटती रहीं, लेकिन तुम्हारे किसी भी साथी पर एक भी लाठी नहीं पड़ी."

सीजेपी का पुलिस पर गंभीर आरोप

सीजेपी ने सोमवार को संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है. पार्टी का दावा है कि अभिनेता प्रकाश राज और शबाना आज़मी के साथ भी धक्का-मुक्की की गई. वहीं, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि को भी निशाना बनाया गया.

सीजेपी के अनुसार, लोगों को ले जा रहे ट्रक पर पुलिस ने कार्रवाई की और एक प्रदर्शनकारी को घसीटते हुए दौड़ाया गया.

पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि गीतांजलि को बाल पकड़कर घसीटा गया. उन्होंने दावा किया कि कई युवाओं के सिर फट गए और उनकी पसलियां टूट गईं. रांका ने पुलिस की कार्रवाई को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि पुलिस को सख़्ती बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे.

उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के बाद आंदोलन और बड़ा होगा तथा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े तक प्रदर्शन जारी रहेगा.

रांका ने सरकार के साथ सोमवार को हुई बैठक की भी आलोचना करते हुए कहा कि बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. उन्होंने कहा कि आगे की बातचीत प्रदर्शन स्थल पर ही होनी चाहिए.

दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया है. पुलिस ने विशेष रूप से 12 वर्षीय बच्ची और गीतांजलि के साथ मारपीट, बाल खींचने या सिर में चोट लगने के दावों को खारिज किया है. पुलिस ने यह भी कहा कि 40-50 लोगों के घायल होने की ख़बरें भी सही नहीं हैं.

तनाव के बावजूद सीजेपी के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से मुलाक़ात की. यह केंद्र सरकार के साथ उनकी पहली औपचारिक बातचीत थी.

आशुतोष रांका के अनुसार, नड्डा ने भाजपा नेतृत्व से चर्चा के लिए कुछ और समय मांगा है. फिलहाल, सीजेपी की मांगों पर सरकार की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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