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सोनम वांगचुक को अस्पताल से डिस्चार्ज करने को लेकर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के क्या हैं मायने
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सफ़दरजंग अस्पताल से छुट्टी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि 'हर जीवन मूल्यवान है.'
साथ ही हाई कोर्ट ने कहा कि सोनम वांगचुक की सफ़दरजंग अस्पताल से छुट्टी के मामले में फ़ैसला 'मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा.'
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है फ़िलहाल इस मामले पर किसी 'अंतरिम आदेश की ज़रूरत नहीं है'.
हाई कोर्ट ने तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा है. इस याचिका में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होनी है यानी वांगचुक को अगले तीन दिनों तक सफ़दरजंग अस्पताल में ही रहना होगा.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की ओर से यह याचिका रविवार सुबह चार बजे दाख़िल की गई थी जिसे रविवार होने के बावजूद हाई कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया.
मामला क्या है?
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे. लेकिन शनिवार की सुबह उन्हें पुलिस ने वहाँ से हटा दिया था.
पुलिस ने सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफ़दरजंग हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया था. इससे पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और सोनम वांगचुक ने कहा था कि वे सोमवार को संसद मार्च करेंगे.
डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले पर जानकारी देते हुए एक्स पर बताया था कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने जो निर्देश दिया था, उसका मतलब ये था कि अगर सोनम वांगचुक की हालत ख़राब होती है तो उन्हें अस्पताल में ले जाया जा सकता है.
16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने राकेश कुमार सैनी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई थी.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया था कि सरकारी डॉक्टर रोज़ाना वांगचुक की निगरानी करेंगे और ज़रूरत पड़ने पर आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप करेंगे.
दिल्ली हाई कोर्ट में रविवार को क्या हुआ
लाइव लॉ के मुताबिक़ रविवार को सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, "यह ध्यान रखा जाए कि किसी भी चिकित्सीय स्थिति से जुड़ा अंतिम फ़ैसला मेडिकल टीम ही करेगी, जो निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार निर्णय लेगी."
पुणे के डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज के प्रोफ़ेसर अमिताव बनर्जी कहते हैं, "कोई भी सामान्य स्वस्थ इंसान बिना भोजन के एक महीने तक रह सकता है. उसके बाद डॉक्टर की निगरानी बेहद ज़रूरी है. ज़्यादा दिनों तक भूखे रहने के लिए ज़रूरी है कि आप आराम की अवस्था में रहें यानी शरीर ज़्यादा काम न करे."
उनका कहना है, "आप कुछ काम न भी करें तो सबसे पहले ब्लड में मौजूद शुगर कम होना शुरू होता है क्योंकि शरीर को काम करने के लिए (मेटाबॉलिक एक्टिविटी) एक न्यूनतम मात्रा में इसकी ज़रूरत होती है. इसके बाद लिवर में मौजूद शुगर यानी ग्लाइकोजेन कम होना शुरू होता है."
अमिताव बनर्जी का कहना है, "बाद में शरीर में जहां-जहां फ़ैट मौजूद होता है वह डिकंपोज़ होने लगता है और उसके बाद भूखे रहने से मांसपेशियों- जिनमें हृदय और किडनी की मांसपेशियाँ भी शामिल हैं, उन पर असर पड़ने लगता है."
सोनम वांगचुक 21 दिनों से ज़्यादा समय से अनशन पर हैं. इस दौरान वो ज़्यादातर लेटे हुए ही दिखे हैं. यानी उन्होंने यह कोशिश ज़रूर की है कि वे शारीरिक गतिविधियों को इस तरह रखें, ताकि लंबे समय तक अपने अनशन को जारी रख सकें.
अदालत को यह भी बताया गया कि वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर ख़तरनाक रूप से कम है. अदालत को यह भी बताया गया कि उन्हें आईवी फ्लूइड्स (नसों के ज़रिए तरल पदार्थ) नहीं दिए गए, क्योंकि उन्होंने इसके लिए सहमति नहीं दी थी.
बार एंड बेंच के मुताबिक़, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने कहा, "हर जीवन मूल्यवान है और इसका ध्यान रखा जाना चाहिए."
अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और डॉक्टरों की इस दलील को भी रिकॉर्ड पर लिया कि वांगचुक की पत्नी और उनके भाई को 24 घंटे अस्पताल में आने-जाने की अनुमति दी गई है. साथ ही अलग से कमरा दिया गया है ताकि वो परिवार संग समय बिता सकें.
गीतांजलि की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जिरह की.
सुनवाई के दौरान जस्टिस मिनी पुष्करणा की अदालत ने भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के इस आश्वासन को दर्ज किया कि मेडिकल रिपोर्ट वांगचुक के परिवार के साथ साझा की जाएगी.
बार एंड बेंच के मुताबिक़, गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा और अखिल सिब्बल ने दलील दी कि सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद वांगचुक का अपने वकीलों और डॉक्टरों से संपर्क टूट गया है.
उन्होंने कहा कि वो वांगचुक को मेदांता अस्पताल ले जाना चाहते हैं और इससे ज़्यादा कोई मांग नहीं कर रहे हैं.
इस मुद्दे पर वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "रविवार की सुनवाई में कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया और इस मामले में जवाब मांगा है. शायद कोर्ट को लगा हो इस मामले की सुनवाई डिविज़न बेंच में हो चुकी है और वही पूरा पक्ष सुनकर फ़ैसला दे."
"अगर सोनम वांगचुक को लेने के लिए किसी दूसरे हॉस्पिटल की टीम आती और उन्हें नहीं जाने दिया जाता तब देखना होता कि कोर्ट क्या आदेश देता है. फ़िलहाल तो ऐसा नहीं हुआ है."
कपिल सिब्बल ने तर्क दिया, "वह (सोनम वांगचुक) हिरासत में नहीं हैं. उनके ख़िलाफ़ कोई मामला नहीं है. क्या भारत के किसी नागरिक को अपनी पसंद के अस्पताल में जाने की अनुमति नहीं है? सरकार यह कैसे कह सकती है कि उसके शरीर पर उसका नियंत्रण है और उसे वहां नहीं जाने दिया जाएगा?"
संजय हेगड़े कहते हैं, "वो बिना कोर्ट में गए हॉस्पिटल छोड़ सकते थे. ऐसे मामले में डॉक्टर एलएएमए (लेफ़्ट अगेन्स्ट मेडिकल एडवाइस) लिख देते. यानी वो बिना डॉक्टरों की सलाह के हॉस्पिटल छोड़ सकते थे. सोनम वांगचुक के मुद्दे पर अगर कोर्ट में याचिका डाली गई है तो कोर्ट के मुताबिक़ चलना होगा."
सिब्बल ने कहा कि उन्हें इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि एम्स या सफ़दरजंग अस्पताल के डॉक्टर भी मेडिकल टीम का हिस्सा बनें.
सिब्बल ने कहा, "हिरासत में रखने का उनके पास कोई आधार नहीं है. मुझे अपनी पसंद के डॉक्टर या अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है."
सिब्बल ने कहा कि वांगचुक के कमरे के अंदर पुलिसकर्मी तैनात हैं.
उन्होंने कहा, "क्या परिवार को उनकी सेहत की चिंता डॉक्टरों से कम है?"
सरकार का क्या कहना है?
बार एंड बेंच के मुताबिक़, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दलील दी कि 16 जुलाई के आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि वांगचुक के इलाज को लेकर कोई भी दख़ल और इलाज की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी.
उन्होंने कहा कि फिलहाल सफ़दरजंग अस्पताल और एम्स के डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है.
एएसजी ने कहा कि उमस भरे मौसम में 18 दिन का उपवास गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं पैदा कर सकता है.
उन्होंने कहा, "संदेह करने की कोई वजह नहीं है. उनकी पूरी देखभाल की जा रही है. लेकिन उन्हें इलाज कर रहे डॉक्टरों का सहयोग करना होगा."
एएसजी ने यह भी सवाल उठाया कि वांगचुक से उनके वकील को मिलने की ज़रूरत क्या है, जबकि वह अस्पताल में हैं, अदालत में नहीं.
उन्होंने आगे कहा, "मौजूदा परिस्थितियों में उनके साथ कुछ भी होता है तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. ऐसे में सरकार को और ज़्यादा सतर्क तथा अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी."
शर्मा ने कहा कि जब से वांगचुक अस्पताल में भर्ती हैं, तब से उनके परिजनों ने डॉक्टरों से कहा है कि उन्हें उनके इलाज पर भरोसा नहीं है.
इस मामले पर अदालत में एम्स के डॉक्टर अक्षय ने कहा, "हम सोनम वांगचुक का इलाज कर रहे हैं. उन्होंने कल से कुछ तरल पदार्थ लेना शुरू किया है और बिना चीनी वाला ओआरएस भी लेना शुरू किया है. हम उन्हें आईवी फ्लूइड देने के लिए लगातार समझा रहे हैं, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया."
डॉक्टर अक्षय ने बताया, "उन्हें विटामिन की भी ज़रूरत है, लेकिन उन्होंने वह भी लेने से मना कर दिया. उनके कुछ चिकित्सकीय मानक सीमा के क़रीब हैं और कुछ सामान्य से कम हैं. उनके शरीर में पानी की कमी है और उन्हें पोटैशियम की ज़रूरत है."
सफदरजंग अस्पताल के निदेशक ने भी कहा कि वांगचुक के परिवार ने उनके इलाज पर भरोसा न होने की बात कही है.
व्यक्तिगत रूप से पेश हुईं अंगमो ने भी दलील दी कि डॉक्टर सहयोग नहीं कर रहे थे और निजी लैब में जांच कराने के लिए रक्त का नमूना देने में देरी की गई. उन्होंने कहा, "इसी वजह से डॉक्टरों पर हमारा भरोसा ख़त्म हो गया."
एफ़एआईएमए ने राष्ट्रपति मुर्मु को लिखी चिट्ठी
फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (एफ़एआईएमए) ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके स्वास्थ्य पर दिन में दो बार पारदर्शी मेडिकल बुलेटिन जारी करने का भी अनुरोध किया है.
साथ ही यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि उनकी गरिमा, कानूनी अधिकार और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित रहें.
एफ़एआईएमए ने मांग की है कि 'नीट में बार-बार सामने आ रही कथित अनियमितताओं, एनटीए की जवाबदेही तय करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए वे तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करें.'
एफ़एआईएमए का कहना है कि छात्र पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय के हकदार हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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