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7 लोक कल्याण मार्ग कब बना पीएम आवास और कब-कब इसके बाहर हुए विरोध प्रदर्शन
- Author, मोहम्मद शाहिद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
नई दिल्ली इलाक़े में सोमवार से काफ़ी हलचल जारी है. सोमवार को जहां संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ तो वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च का आह्वान किया था.
सीजेपी अपने मार्च में सफल नहीं हो पाई और प्रदर्शनकारियों को सख़्त पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा. हालांकि सीजेपी के प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर वापस जंतर-मंतर पर बैठ गए.
मंगलवार को संसद सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास सात लोक कल्याण मार्ग पहुंच गए. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की.
इसके बाद पीएम आवास के बाहर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया.
कुछ नेताओं को मंदिर मार्ग थाने और कुछ को छत्रसाल स्टेडियम में रखा गया था. आख़िरकार रात 10 बजे के क़रीब सभी को रिहा कर दिया गया.
इस प्रदर्शन को प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन कहा जा रहा है.
प्रधानमंत्री आवास का इतिहास
प्रधानमंत्री आवास नई दिल्ली इलाक़े में लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है.
इस सड़क का नाम रेस कोर्स रोड हुआ करता था लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने सितंबर 2016 में इस रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया.
दिल्ली पर कई किताबें लिख चुके और वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला कहते हैं कि ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टॉर रसेल ने रेस कोर्स रोड के आसपास की इमारतों का डिज़ाइन तैयार किया था.
वो बताते हैं, "साल 1925 से नई दिल्ली के इन इलाक़ों में इमारतों का काम शुरू हुआ था और साल 1930 तक ये तैयार हुई थीं. रॉबर्ट टॉर रसेल ने ही वेस्टर्न कोर्ट, ईस्टर्न कोर्ट और तीन मूर्ति भवन डिज़ाइन किए थे."
"लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास कई कोठियों को मिलाकर बना है. लोक कल्याण मार्ग पर 1, 3, 5 और 7 नंबर कोठियों को मिलाकर प्रधानमंत्री आवास बनाया गया था."
"बहुत सारे अनाम मज़दूरों ने इन बंगलों को बनाया जो ज़्यादातर राजस्थान से आए थे. लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह उनको बागड़ी कहते थे. ये मज़दूर दिल्ली के पहाड़ी धीरज और करोल बाग़ जैसे इलाक़ों में परिवार के साथ रहा करते थे और उनके बच्चे आज भी वहीं रहते हैं."
राजीव गांधी से शुरू हुआ सिलसिला
साल 1984 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से 7 लोक कल्याण मार्ग प्रधानमंत्री के आवास के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है.
जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई बताते हैं, "जवाहरलाल नेहरू अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान तीन मूर्ति मार्ग पर रहे. ये कोठी पूर्व ब्रिटिश कमांडर इन चीफ़ का आवास हुआ करती थी. नेहरू के निधन के बाद इसे मेमोरियल में तब्दील कर दिया गया."
"लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने के बाद वो 9 जनपथ वाले अपने आवास में ही रहे. 1966 में उनके निधन के बाद इस जगह को भी मेमोरियल में बदल दिया गया. इंदिरा गांधी 1 सफ़दरजंग रोड वाले आवास में ही रहीं और वहीं उनकी हत्या हुई. मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान वहीं रहे जहां पहले से उनके आवास थे."
रशीद किदवई बताते हैं कि राजीव गांधी पहले प्रधानमंत्री थे जो सुरक्षा कारणों से 7 रेस कोर्स रोड वाले आवास में रहने आए थे और वीपी सिंह की सरकार में इसको प्रधानमंत्री आवास के तौर पर समर्पित किया गया था.
वो बताते हैं कि नरसिम्हा राव, आईके गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी आवास में रहे हैं, हालांकि चंद्रशेखर अपने 7 महीने के कार्यकाल में इस जगह नहीं रहे.
कब कब इसके बाहर हुए प्रदर्शन
रेस कोर्स रोड या अब लोक कल्याण मार्ग एक भारी सुरक्षा बंदोबस्त वाला इलाक़ा रहा है.
विवेक शुक्ला बताते हैं कि अशोका होटल से लेकर सफ़दरजंग रोड थाने तक इस इलाक़े में कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता है, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री आवास के क़रीब तक प्रदर्शन होते रहे हैं.
वहीं, रशीद किदवई कहते हैं कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहती है इसलिए यहां इकट्ठा नहीं हुआ जा सकता है. वो राहुल गांधी के नेतृत्व में मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शन को काफ़ी बड़ा मानते हैं.
वो कहते हैं, "पीएम आवास के इतने नज़दीक प्रदर्शन करना एसपीजी की एक चूक है और पीएम आवास के बाहर इतनी देर तक कभी भी कोई प्रदर्शन नहीं हो सका था."
कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन से पहले साल 2011 के प्रदर्शन को रशीद किदवई पीएम आवास के बाहर अब तक का हुआ बड़ा विरोध प्रदर्शन मानते हैं.
जन लोकपाल की मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के समर्थक पीएम आवास के बाहर जमा हुए थे. उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद पर थे और तक़रीबन 40 पुरुषों और छह महिलाओं को हिरासत में लिया गया था.
रशीद किदवई बताते हैं कि जब तक बीजेपी विपक्ष में थी तब तक उसने कई बार पीएम आवास तक मार्च करने का आह्वान किया था, हालांकि प्रदर्शनों के लिए तयशुदा जगह जंतर-मंतर है, इससे पहले बोट क्लब प्रदर्शनों के लिए तयशुद जगह थी लेकिन इसके संसद से नज़दीक होने की वजह से यहां पर अब प्रदर्शन की अनुमति नहीं है.
विवेक शुक्ला बताते हैं, "2012 में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन किया था. वहीं 2013 में मनमोहन सिंह सरकार के कथित भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन करना चाहा था."
"साल 2013 में ही टीडीपी के सांसदों ने कृष्णा नदी के जल विवाद को लेकर पीएम आवास के नज़दीक सांकेतिक रूप से प्रदर्शन किया था. वहीं साल 1984 के सिख दंगों के बाद से समय समय पर सिख संगठन छिटपुट प्रदर्शन करते रहे हैं. लेकिन मेरा मानना है कि मंगलवार को कांग्रेस का प्रदर्शन अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन था."
वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के समय जब 1999 में कांधार विमान अपहरण हुआ तो अपहृत विमान में सवार यात्रियों के परिजन और अलग-अलग संगठन पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन करते थे.
हालांकि 7 लोक कल्याण मार्ग अब कब तक प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास रहेगा ये साफ़ नहीं है, लेकिन साउथ ब्लॉक के नज़दीक बन रहे नए सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्लान में प्रधानमंत्री का नया आवास भी प्रस्तावित है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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