म्यांमार में लोगों ने ठुकराई सैन्य शासकों की अपील, कई शहरों में प्रदर्शन जारी
म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन जारी हैं.
म्यांमार में लोगों ने सैन्य शासकों की उस अपील को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने लोगों से उनका हाथ थामने की बात कही थी.
शुक्रवार को एक बार फिर म्यांमार के नागरिकों ने कई बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए.
इससे पहले, म्यांमार के यूनियन दिवस के अवसर पर जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने कथित विघटन को रोकने के लिए एकता बनाए रखने का आह्वान किया था.
लेकिन शुक्रवार को विरोध प्रदर्शनों का वही पैटर्न दिखाई दिया और नज़रबंद नेता आंग सान सू ची को रिहा कराने की माँग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ जगहों पर रबड़ की गोलियां दाग़े जाने की बात भी कही गई है.
गुरुवार को लाइव टीवी प्रसारण के ज़रिए म्यांमार-वासियों को संबोधित करते हुए जनरल मिन आंग ने कहा था कि ‘जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें उकसाया गया है. मैं उनसे एक बार फिर अपील करूंगा कि वो भावनाओं पर ध्यान दिए बिना राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगें.’
यूनियन दिवस पर म्यांमार के सैन्य शासकों ने थोड़ी दरियादिली भी दिखाई. उन्होंने 23 हज़ार से अधिक क़ैदियों को रिहा करने का आदेश दिया जिनमें 55 विदेशी क़ैदी भी शामिल हैं.
हालांकि जानकार कहते हैं कि म्यांमार के शासक पहले भी ऐसे निर्णय लेते रहे हैं, ताकि खचाखच भरी म्यांमार की जेलों का बोझ थोड़ा कम किया जा सके.
लेकिन कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं को सैन्य शासकों के इस निर्णय पर थोड़ा शक़ है.
एक छात्र कार्यकर्ता तेज़ार सान ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ‘उन्हें डर है, कहीं क़ैदियों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों पर हमला करवाने के लिए ना किया जाये.’
उन्होंने कहा, “हमारे बीच बहुत बुरी मिसालें मौजूद हैं. साल 1988 में सैन्य शासकों ने फ़ौज समर्थक क़ैदियों को जेल से रिहा कर दिया था, जिन्होंने लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बहुत परेशान किया.”
माना जाता है कि साल 1988 के लोकतंत्र समर्थक विद्रोह में हज़ारों लोग मारे गये थे.
अपने भाषण में गुरुवार को जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने कहा था कि ‘लोग अपने घरों में रहें और ध्यान रखें कि कोरोना महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है.’
जनरल मिन ने कोशिश की कि लोगों को महामारी का हवाला देकर प्रदर्शनों में शामिल होने से रोका जाए. लेकिन शुक्रवार को लोगों की भीड़ हेलमेट और मास्क लगाकर विरोध प्रदर्शन करती नज़र आई.