अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की प्रमुख ने उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों से आग्रह किया है कि वे कम आय वाले देशों को संसाधन मुहैया कराए.
उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं किया गया तो वैश्विक वृद्धि में एक ‘बड़ा भटकाव’ आएगा जिससे स्थिरता को ख़तरा पैदा होगा और आने वाले सालों में सामाजिक अशांति बढ़ेगी.
आईएमएफ़ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा है कि 50 फ़ीसद विकासशील देशों के पीछे रह जाने का ख़तरा है, जिससे स्थिरता और सामाजिक अशांति को लेकर चिंताएँ बढ गई हैं. बड़ी समस्याओं को टालने के लिए ज़रूरी है कि अमीर देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ और अधिक मदद करें.
उन्होंने भारी क़र्ज़ में डूबे देशों से आग्रह किया है कि वो जल्द से जल्द क़र्ज़ को लेकर फिर से कोई नई व्यवस्था लागू करें और विकास को लेकर माहौल तैयार कर उसे बढ़ावा दें.
उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए संवाददाताओं से कहा, “पिछले साल हमारा सारा ध्यान लॉकडाउन पर था इस साल अर्थव्यवस्था में ‘एक बड़े भटकाव’ का जोखिम है. हमारा अनुमान है कि विकासशील देश जो दशकों से आय के मामले में लगभग ठहरे हुए हैं, वे इस बार मुश्किल हालात का सामना करेंगे.”
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के जीवन स्तर में आई गिरावट से दुनिया के बाक़ी हिस्सों में स्थिरता और सुरक्षा कायम रखने में कठिनाई होगी. भारत उन विकासशील देशों में जहाँ की आबादी सबसे ज़्यादा है और अर्थव्यवस्था पटरी से नीचे है.
उन्होंने बताया, “सामाजिक अस्थिरता के बढ़ने का ख़तरा है. आप इसे एक खोया हुआ दशक कह सकते हैं.”
जॉर्जीवा ने कहा कि उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों ने अपनी जीडीपी का 24 फ़ीसद महामारी से निपटने में खर्च किया है जबकि उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों ने छह फ़ीसद और कम आय वाले देशों ने दो फ़ीसद खर्च किया है.
जॉर्जीवा ने बताया कि ग़रीब देशों में फंड कम होने की वजह से वैक्सीनेशन की कोशिशें अनियमित रही हैं और उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. अफ्रीका में सिर्फ़ मोरक्को अकेला ऐसा देश है जहाँ आम नागरिकों को वैक्सीन देने की शुरुआत हुई है. उन्होंने कई अफ्रीकी देशों में मृत्यु दर को लेकर अपनी चिंता प्रकट की.
उन्होंने कहा, “हमें अपनी क्षमता के अनुरूप इस ख़तरनाक विचलन को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए.”
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को ध्यान में रखते हुए अमीर देशों को और अधिक डिज़िटल और पर्यावरण का ख्याल रखती हुई अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन में तेज़ी लाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में साल 2025 तक नौ खरब डॉलर का इजाफा हो सकता है. जिससे 60 फ़ीसद का फ़ायदा विकासशील देशों को मिलेगा.
जॉर्जीवा ने बताया कि वो आईएमएफ़ के शेयर होल्डर्स के साथ मिलकर ग़रीब देशों को अपनी करेंसी या स्पेशल ड्राविंग राइट्स (एसडीआर) के माध्यम से फंड मुहैया कराने को लेकर कोशिशें कर रही हैं.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तरह की कोशिशों पर पहले रोक लगा दी थी. अब जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद इसके संभव हो पाने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि उनका प्रशासन नई फंडिंग को लेकर सकारात्मक है. हालांकि बाइडन ने इस मसले पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है.
जॉर्जीवा ने बताया कि 250 बिलियन के एसडीआर की फंडिंग से साल 2009 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में काफी मदद मिली थी.
उन्होंने कहा कि अभी के हालात तो उस वक्त के संकट से कहीं अधिक चिंताजनक है.उन्होंने बताया कि आईएमएफ़ दीर्घकालिक नकदी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसकी समीक्षा कर रहा है ताकि एसडीआर के आवंटन को उचित ठहराया जा सके हालांकि उन्होंने इस बारे में और अधिक कोई विवरण नहीं दिया.
सूत्रों के मुताबिक सात वित्तीय अधिकारी संभावित नए एसडीआर आवंटन को लेकर 12 फ़रवरी को एक बैठक करने वाले हैं.