दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद सीजेपी के आंदोलन का भविष्य क्या होगा?

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- Author, प्रवीण
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे.
लेकिन शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई.
दिल्ली पुलिस ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद सोनम वांगचुक को यहां से हटाया जा रहा है.
शनिवार को सोनम वांगचुक के अनशन का 21वां दिन था. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया था.
सोनम वांगचुक को ले जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं. 20 जुलाई को होने वाला 'चलो संसद' मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा."
दरअसल, 20 जुलाई को सीजेपी ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' अभियान के तहत संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का एलान किया है.
बुधवार रात को सोनम वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से एक वीडियो जारी कर लोगों से इस मार्च में पहुंचने की अपील की थी.
लेकिन अब सवाल है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल में ले जाने के बाद 20 जुलाई को होने वाले मार्च का क्या होगा और इस आंदोलन के लिए आगे की राह क्या है?
सीजेपी क्या कह रही है?

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शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि उनके पति का अनशन अभी भी जारी है, उन्होंने किसी भी तरह की शुगर का सेवन नहीं किया है.
गीतांजलि का यह बयान वांगचुक के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती होने के बाद आया है.
शनिवार को इस घटना के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए शनिवार सुबह इस बात की जानकारी दी गई.
सीजेपी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया, "अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं. 20 जुलाई को होने वाला 'चलो संसद' मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा."
अभिजीत दीपके ने भी एक्स पोस्ट के ज़रिए इसकी पुष्टि की है.
शुरुआत से ही सीजेपी के आंदोलन का समर्थन कर रहे राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने एक्स पर एक वीडियो जारी कर कहा कि जिनके मन में ये सवाल है कि आंदोलन का भविष्य क्या होगा उन्हें जंतर-मंतर पर आकर तस्वीर को देखना चाहिए.
उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस ने कायरना हरकत की है. उन्हें सफेद चादर में ऐसे बांधकर ले जाया गया है जैसा इस देश में किसी ज़िंदा इंसान को कभी नहीं ले जाया जाता है. बहाना ये लगाया गया कि कोर्ट का ऑर्डर था. लेकिन कोर्ट का ऑर्डर ये बात नहीं कहता है कि उन्हें घसीटकर ले जाया जाए. किसी डॉक्टर ने ने नहीं कहा था कि उनके वाइटल्स डाउन थे. वाइटल्स मोदी सरकार के डाउन थे. इस बात का नतीजा ये हुआ है कि इस आंदोलन में और ऊर्जा बढ़ गई है."
"अभिजीत दीपके अब अनशन पर बैठ गए हैं और कहा है कि 20 जुलाई का मार्च पहले की तरह ही होगा. अभिजीत ने कहा है कि अब तक तो धमेंद्र प्रधान का ही इस्तीफ़ा मांगा जा रहा था. लेकिन अब पीएम मोदी का भी इस्तीफ़ा मांगा जाएगा. मतलब ये आंदोलन अब व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन बन गया है."
उन्होंने कहा, "यह उस शिक्षा व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन है जो शिक्षा नहीं देती, उस आर्थिक व्यवस्था के विरुद्ध जो रोज़गार नहीं देती, और उस राजनीतिक व्यवस्था के विरुद्ध जो जवाब नहीं देती. ये आंदोलन अब आगे बढ़ रहा है."
"जब जब युवाओं के आंदोलन का दमन हुआ है वो आंदोलन आगे बढ़ा है, आगे फैला है."
'आंदोलन को मिली गति'

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सोनम वांगचुक के अलावा जंतर-मंतर पर छात्र संगठन एआईएसए के तीन सदस्य नेहा, मनीष और आमीन भी 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे.
ये लोग भी उन्हीं मांगों के समर्थन में हैं, जिनकी मांग सीजेपी ने की है. सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से ले जाने के बाद भी इन लोगों की भूख हड़ताल जारी है.
स्वतंत्र पत्रकार स्मिता शर्मा पहले दिन से ही जंतर-मंतर पर सीजेपी के आंदोलन को कवर कर रही हैं. हमने उनसे जानने की कोशिश की कि दिल्ली पुलिस के एक्शन का आंदोलन के भविष्य पर क्या असर होगा.
स्मिता शर्मा ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को सही नहीं बताया है. उनका मानना है कि दिल्ली पुलिस के एक्शन के बाद शनिवार को आंदोलन में तेजी देखने को मिली है और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर जंतर-मंतर पर पहुंच रहे युवाओं में गुस्सा है.
उन्होंने बताया, "मैं जो आज (शनिवार को) महसूस कर पा रही हूं कि निश्चित रूप से अब बहुत ज्यादा तादाद में लोग जंतर-मंतर पर पहुंचे हैं. काफी लोगों में गुस्सा नजर आ रहा है जो मानते हैं कि यह बात जो हुई है वह गलत हुई है."
"क्योंकि सोनम वांगचुक की टीम के लोग भी कह रहे हैं कि कोर्ट ने तो यही कहा था कि आप उनकी मेडिकल निगरानी रखिए. यह नहीं कहा है कि आप जबरदस्ती उनका अनशन तुड़वाइए. नियम ये है कि अगर किसी की वाइटल ऑर्गन्स को खतरा हो तब आप ऐसी कार्रवाई कर सकते हैं. लेकिन फिलहाल अभी कोई ऐसी बात नहीं थी."
स्मिता शर्मा का मानना है कि इस आंदोलन को अभी तक ज्यादा समर्थन सोनम वांगचुक की वजह से ही मिल रहा है. उन्होंने कहा, "पूरे प्रदर्शन में जो सबसे ज्यादा समर्थन देखने को मिला वो सोनम वांगचुक के अनशन पर बैठने के बाद ही देखने को मिला. उन्हें जिस तरीके से हटाया गया है कि उसके बाद इस आंदोलन को मोमेंटम मिला है."
स्मिता शर्मा का मानना है कि सरकार का यह कदम दिल्ली पुलिस को बैक फायर कर सकता है.
उन्होंने कहा, "अब ज्यादा तादाद में लोग जंतर-मंतर पर आ रहे हैं और सोमवार से मॉनसून का संसद का सत्र है. अब अगर इन लोगों को वह हटाने के लिए बल प्रयोग करेंगे तो उसका भी खामियाजा होगा. अगर नहीं भी हटाते हैं तो विपक्षी सांसद जो इस आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं, सोमवार से उनमें से कई लोग भी आकर यहां पर बैठेंगे तो निश्चित रूप से मुमकिन है कि पुलिस की कार्रवाई सरकार पर बैक फायर कर सकती है."
सोनम वांगचुक को हटाने के बाद से ही सीजेपी की ओर से ये आशंका जताई जा रही है कि आंदोलन को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस बल इस्तेमाल कर सकती है.
शनिवार को कई बार सीजेपी ने लोगों से ज्यादा तादाद में जंतर-मंतर पर पहुंचने की अपील की.
इस अपील पर स्मिता शर्मा कहती हैं, "अभी तक हमने देखा है पिछले 12 सालों में पुलिस का और खास करके दिल्ली पुलिस का रवैया तब क्या रहा है जब प्रदर्शन हुए हैं. पहलवान जब जंतर-मंतर पर बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे तो उनके ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल किया गया था."
"आवारा कुत्तों पर आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के विरोध में भी जब प्रदर्शन हुए तब भी ऐसा हुआ था. हैरान करने वाली बात यह थी कि अब तक दिल्ली पुलिस ने ऐसा कोई कदम क्यों नहीं उठाया था."
आंदोलन का भावुक क्षण

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स्मिता शर्मा शनिवार को दिल्ली पुलिस की हुई कार्रवाई को आंदोलन का सबसे भावुक क्षण बता रही हैं.
उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से आज क्योंकि एक भावुक क्षण भी है प्रोटेस्ट के लिए. आज टीम के बहुत सारे लोग रोते हुए नज़र आए. भावुक होते नजर आए."
दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस आंदोलन में कोई कार्रवाई क्यों नहीं कि इस सवाल का जवाब देते हुए स्मिता शर्मा ने कहा, "कहीं ना कहीं एक ग्राउंड टेस्टिंग की जा रही थी. 6 जून को सब कुछ जो हुआ था वो बहुत अचानक हुआ था. अभिजीत दीपके अमेरिका से लौटे थे. सोनम की तबियत खराब हो गई थी. लेकिन बाद में आंदोलन को अच्छी दिशा मिली. अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किए गए. और ज्यादा लोग आंदोलन के साथ जुड़े."
"शनिवार को सोनम के अनशन का 21वां दिन था. सरकार अभी तक उनका अनशन तुड़वा नहीं पाई. तो यह ग्राउंड टेस्टिंग वाली बात है जिसकी वजह से और कल ही हमने देखा कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर जो है वो बदले गए हैं.
"तो कहीं ना कहीं एक एजेंडा ऐसा लगता है फिक्स किया गया कि पुराने कमिश्नर ने जिस तरीके से अभी तक हैंडल किया था, शायद उससे सरकार खुश नहीं थी और पूरी तरीके से अब सरकार की तैयारी है कि बहुत हो गया. क्योंकि ये मोदी सरकार का स्टाइल ही है कि जब मीडिया के सवाल किसी मंत्री से पूछे जाते हैं या किसी नेता पर पब्लिक अटैक हो रहा हो है तो उनको कभी हटाया नहीं जाता है. तो इसीलिए मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी स्ट्रैटेजी रिवर्क की है."
हालांकि अभी भी ये सवाल कायम है कि सीजेपी की ओर से 20 जुलाई को जिस मार्च का कॉल दिया गया है उसका भविष्य क्या होगा.
इस सवाल के जवाब में स्मिता शर्मा कहती हैं, "मुश्किल है. इन्हें मार्च करने दिया जाएगा, ऐसा नहीं लगता. फिलहाल जनता की बहुत भीड़ देखने को मिल रही है. रविवार को भी ऐसा जारी रह सकता है. इसीलिए रविवार को भी पुलिस की ऐसी कार्रवाई देखने को मिल जाए. इस बात को नकारा नहीं जा सकता है."
"सरकार को अगर लगने लगा कि ये किसान आंदोलन जैसा कोई बड़ा मूवमेंट बनने लगा है, बहुत लोगों की तादाद आने लगी तो फिर तो सरकार ऐसा कुछ होने नहीं देगी. हालांकि इसके बावजूद आंदोलन तुरंत खत्म हो जाएगा, ऐसा मुझे नहीं लगता है. यह आंदोलन नहीं तो कुछ और सस्टेन ज़रूर करेगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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