लाइव, दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक के बारे में दी ये नई जानकारी

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय तक अनशन पर रहने के बाद कमज़ोर हो गए हैं.

सारांश

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  • सोनम वांगचुक को पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाया
  • भूख हड़ताल पर बैठे अभिजीत दीपके
  • सर गारफ़ील्ड सोबर्स का 89 वर्ष की उम्र में निधन
  • नारंगी होंठ वाले बंदर की नई प्रजाति
  • एक कबूतर को ऑक्सीजन देकर बचाया गया
  • सोनम वांगचुक के अनशन का 20वां दिन
  • भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक के बारे में दी ये नई जानकारी

    सोनम वांगचुक

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    इमेज कैप्शन, डीसीपी नई दिल्ली ने कहा कि सोनम वांगचुक में शरीर में पानी की कमी के संकेत मिले हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय तक अनशन पर रहने के बाद कमज़ोर हो गए हैं.

    डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि वांगचुक में शरीर में पानी की कमी के संकेत मिले हैं.

    डीसीपी नई दिल्ली ने एक्स पर लिखा है, ''हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार और रोज़ाना होने वाली जांच के तहत डॉक्टर सोनम वांगचुक की मेडिकल जांच के लिए पहुंचे थे. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने रुकावट पैदा की. इससे कुछ हंगामा भी हुआ."

    "वांगचुक की नाज़ुक स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें मेडिकल जांच और आगे की ज़रूरत के अनुसार इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया."

    डीसीपी नई दिल्ली ने बताया, "इसके बाद डॉक्टरों ने वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की जांच की और बताया कि लंबे समय तक फास्टिंग रखने के कारण वह कमज़ोर हो गए हैं और उनमें शरीर में पानी की कमी के संकेत मिले हैं. उन्हें निगरानी में रखा गया है."

    दिल्ली पुलिस ने बताया कि आगे की जांच की जा रही है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है."

    दूसरी ओर, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा कि अभी उनका कोई इलाज नहीं चल रहा है, सिर्फ़ निगरानी और जांच की जा रही है.

  2. सोनम वांगचुक की पत्नी बोलीं- उनका अनशन अब भी जारी है

    गीतांजलि जे अंगमो

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    इमेज कैप्शन, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो

    सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि उनके पति का अनशन अभी भी जारी है, उन्होंने किसी भी तरह की शुगर का सेवन नहीं किया है.

    गीतांजलि का यह बयान वांगचुक के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती होने के बाद आया है. दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से शनिवार को वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल लेकर गई थी.

    गीतांजलि ने बताया कि वांगचुक केवल वही नमक वाला पानी ले रहे हैं, जो वह पहले से पीते आ रहे थे.

    मीडिया से बातचीत में गीतांजलि ने कहा, "हाई कोर्ट के आदेश में कहीं भी सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करने का निर्देश नहीं दिया गया था. आदेश में सिर्फ व्यक्ति की सेहत को प्राथमिकता देने और नियमित निगरानी किए जाने की बात कही गई थी."

    उन्होंने आगे कहा, "जो कुछ हुआ, वह हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार नहीं है. अभी कोई इलाज नहीं चल रहा है. सिर्फ़ निगरानी और जांच की जा रही है. हम बाहर की लैब से भी जांच करवाने जा रहे हैं, क्योंकि मांगी गई रिपोर्ट हमें उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं."

    उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की दवा देने से पहले वह रिपोर्ट की जांच किसी दूसरी लैब से करवाना चाहते हैं.

  3. भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ लॉन्च हुआ

    रॉकेट

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    इमेज कैप्शन, रॉकेट की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्च सेंटर से दोपहर 12:05 बजे की गई

    हैदराबाद की स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार (18 जुलाई) को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया.

    रॉकेट की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्च सेंटर से दोपहर 12:05 बजे की गई.

    इससे पहले इसे सुबह 11:30 बजे लॉन्च किया जाना था, लेकिन उड़ान से क़रीब 5 मिनट पहले काउंटडाउन रोक दिया गया.

    कुछ देर के होल्ड के बाद प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई और रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, ‘मिशन आगमन’ नाम से किए गए इस परीक्षण उड़ान के तहत विक्रम-1 कई तकनीकी परीक्षणों से जुड़े पेलोड के साथ रवाना हुआ.

    रॉकेट अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पोस्टकार्ड और ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नामक एक कलाकृति भी लेकर गया है.

    स्काईरूट एयरोस्पेस ने इससे पहले साल 2022 में ‘विक्रम-S’ सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था.

  4. सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने के मामले पर अखिलेश यादव और पवन खेड़ा ने क्या कहा

    अखिलेश यादव और पवन खेड़ा

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    इमेज कैप्शन, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (फ़ाइल फ़ोटो)

    समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने के मामले पर केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है.

    अखिलेश यादव ने कहा है कि जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए आए, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए.

    अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, ज़बरदस्ती आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय समाचार है. आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है. सारी दुनिया और देशभर में सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी. जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए."

    उन्होंने लिखा, "हमारी पुरज़ोर मांग है कि सोनम वांगचुक की चिकित्सा न्यायिक निगरानी में हो क्योंकि उनका जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है."

    कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे संवैधानिक अधिकार पर हमला बताया.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "हमारा संविधान हर नागरिक को अपनी आवाज़ उठाने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का बुनियादी अधिकार देता है. लेकिन आज गृह मंत्रालय का रवैया देखकर लगता है कि उसने इसी संवैधानिक अधिकार को अपना निशाना बना लिया है."

    "दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और कल ही इसी मंत्रालय ने दिल्ली को नया पुलिस कमिश्नर दिया है. अगर आज की बर्बर कार्रवाई कमिश्नर साहब का पहला संदेश है, तो इससे साफ़ पता चलता है कि उनकी वफ़ादारी संवैधानिक कर्तव्य से ज़्यादा सत्ता के प्रति है."

    खेड़ा ने कहा, "आज की घटना ने एक बार फिर इसकी सोच को बेनकाब कर दिया है. इस सरकार के लिए शांतिपूर्ण विरोध किसी नागरिक का बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि एक "कानून एवं व्यवस्था" की समस्या है, जिसे डंडे के ज़ोर पर कुचल देना चाहिए."

    वहीं, सफ़दरजंग अस्पताल के प्रशासन के अनुसार, लंबे उपवास के कारण उन्हें हल्की कमजोरी, डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के संकेत मिले हैं.

    मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ चारु बंबा के मुताबिक़, वांगचुक की हालत स्थिर है, सभी ज़रूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं और वे पूरी तरह होश में हैं. अस्पताल में उनकी निगरानी और उपचार जारी है.

  5. 16 साल तक अनशन पर रहने वालीं इरोम शर्मिला ने सोनम वांगचुक को लेकर ये कहा

    इरोम शर्मिला

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    इमेज कैप्शन, जब इरोम शर्मिला ने भूख हड़ताल शुरू की थी, तब उनकी उम्र 28 साल थी, अब उनकी उम्र 53 वर्ष हो चुकी है (फ़ाइल फ़ोटो)

    मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीयों को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का साथ देना चाहिए.

    उन्होंने कहा कि व्यवस्था को ठीक करने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ वांगचुक की नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक की है, जिसके अंदर सही-ग़लत की समझ है और जो बदलाव लाना चाहता है.

    इरोम शर्मिला ने न्यूज़ वेबसाइट स्क्रॉल डॉट इन से बातचीत में कहा, “यह सिर्फ़ सोनम की ज़िम्मेदारी नहीं है और लोगों को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वह अकेले अपनी जान दे दें. यह सबकी साझा लड़ाई और मांग है. सभी लोगों को उनका साथ देना चाहिए. अगर सभी लोग सड़क पर उतरेंगे, तो सुरक्षा बल भी कम पड़ जाएंगे और सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा.”

    उन्होंने कहा, “सामाजिक बदलाव के लिए किसी साझा मुद्दे पर लगातार कोशिश और एकजुट आवाज़ ज़रूरी है. किसी एक प्रदर्शनकारी को अकेला छोड़कर उसे अपनी जान देने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए.”

    इरोम शर्मिला पूर्वोत्तर भारत में सेना को विशेष अधिकार देने वाले क़ानून, एएफ़एसपीए (सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम) को हटाने की मांग को लेकर 16 साल (नवंबर 2000 से अगस्त 2016 तक) तक भूख हड़ताल पर रहने के लिए पूरी दुनिया में चर्चित रहीं.

    जब इरोम शर्मिला ने भूख हड़ताल शुरू की थी, तब उनकी उम्र 28 साल थी, अब उनकी उम्र 53 वर्ष हो चुकी है.

    गौरतलब है कि शनिवार को ही सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफ़दरजंग अस्पताल ले जाया गया है.

  6. सोनम वांगचुक की हेल्थ पर सफ़दरजंग अस्पताल ने क्या बताया

    सोनम वांगचुक

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    इमेज कैप्शन, सफ़दरजंग अस्पताल ने बताया कि वांगचुक को हल्की कमज़ोरी और शरीर में पानी की कमी है (फ़ाइल फ़ोटो)

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के पुलिस सफ़दरजंग अस्पताल ले गई.

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लंबे समय तक उपवास करने के कारण उन्हें हल्की कमज़ोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत है. फ़िलहाल उनकी हालत स्थिर है और सभी अन्य स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं.

    मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ चारु बंबा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "सोनम वांगचुक आज सुबह क़रीब 7:40 बजे हमारे अस्पताल पहुंचे. लंबे समय से उपवास करने की वजह से उन्हें थोड़ी कमज़ोरी है और शरीर में पानी की हल्की कमी है."

    डॉ चारु के मुताबिक़, "वांगचुक के सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं. उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उनका इलाज जारी है. वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर है. अस्पताल पहुंचने पर सबसे पहले इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ने उनका इलाज किया. इसके बाद उन्हें मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया."

    अस्पताल प्रशासन ने बताया, "वांगचुक के शरीर में पानी की कमी के कारण उनके इलेक्ट्रोलाइट स्तर पर असर के संकेत मिले हैं. इसी वजह से उन्हें कुछ समय तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा. पहले इसे ठीक किया जाएगा और फिर उनकी हालत की दोबारा जांच की जाएगी."

    डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले पर जानकारी देते हुए एक्स पर बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है.

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  7. सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने पर बोले अरविंद केजरीवाल- इतना अहंकार ठीक नहीं

    वांगचुक और अरविंद केजरीवाल

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    इमेज कैप्शन, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 16 जुलाई को जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक से मुलाक़ात की थी (फ़ाइल फ़ोटो)

    आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने के मामले पर केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है.

    केजरीवाल ने मोदी सरकार को 'अहंकारी' बताते हुए कहा कि वांगचुक से बातचीत करने के बजाय उन्हें जबरन उठाया गया.

    केजरीवाल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "इतना अहंकार ठीक नहीं है. उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी."

    उन्होंने आगे कहा, "कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारो. सोनम वांगचुक के साथ की गई ज़बरदस्ती मोदी सरकार की हार है."

    इससे पहले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) ने भी सोनम वांगचुक को कथित तौर पर जबरन अस्पताल ले जाने की आलोचना की थी.

    वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनशन शुरू कर दिया है.

  8. सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने पर कांग्रेस ने क्या कहा?

    सचिन पायलट

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    इमेज कैप्शन, सचिन पायलट ने कहा कि वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाना साफ़ दिखाता है कि सरकार भारी दबाव में है (फ़ाइल फ़ोटो)

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के पुलिस ने उठाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया. इस दौरान जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा.

    इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी महासचिव सचिन पायलट ने कहा कि वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाना साफ़ दिखाता है कि सरकार भारी दबाव में है.

    पायलट ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “यह सरकार की पूरी तरह गलत नीति है. सोनम वांगचुक जी लगभग 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. उन्होंने युवाओं के भविष्य और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े जैसे गंभीर मुद्दे पर खाना छोड़ दिया है. इसके बावजूद सरकार ने उनसे कोई बातचीत नहीं की.”

    सचिन पायलट ने कहा, "अब जब आंदोलन का असर पूरे देश में बढ़ रहा है और जनता का दबाव बढ़ रहा है, तो सरकार उन्हें जबरन अस्पताल ले जा रही है, सिर्फ़ जिम्मेदारी से बचने के लिए. अगर सरकार ने पहले ही बातचीत शुरू की होती और उनकी मांगें मान ली होतीं तो बेहतर होता."

    उन्होंने आगे कहा, "जबरन हटाकर अस्पताल ले जाना साफ़ दिखाता है कि सरकार भारी दबाव में है. नाराज़गी चरम पर है और उन्हें जबरन अस्पताल ले जाना जनता के गुस्से को और बढ़ाएगा, दबाएगा नहीं.”

    गौरतलब है कि वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उन्होंने हाल ही में दावा किया था कि अनशन के दौरान उनके शरीर का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा खत्म हो चुका है.

  9. अभिजीत दीपके ने ख़ुद भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा की

    अभिजीत दीपके

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    इमेज कैप्शन, अभिजीत दीपके ने भी एक्स पोस्ट में बताया कि वो भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. पार्टी के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के जरिए शनिवार सुबह इसकी जानकारी दी गई.

    सीजेपी की ओर से यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब दिल्ली पुलिस पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरनास्थल से उठाकर अस्पताल ले गई.

    सीजेपी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया, “अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं. 20 जुलाई को होने वाला ‘चलो संसद’ मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा.”

    अभिजीत दीपके ने भी एक्स पोस्ट के ज़रिए इसकी पुष्टि की है.

    दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि बिना सहमति के उनके (वांगचुक) मुंह या नसों के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाए.

    डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले पर जानकारी देते हुए एक्स पर बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है.

    सोनम वांगचुक 28 जून से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं. शनिवार को उनकी भूख हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर चुकी है.

  10. सोनम वांगचुक को ऐसे उठाकर ले गई पुलिस, तस्वीरें सामने आईं

    जंतर-मंतर

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    इमेज कैप्शन, सोनम वांगचुक को धरनास्थल के मंच से पुलिस उठाकर लेकर गई, इस दौरान सफ़ेद चादर तानी गई ताकि वांगचुक किसी को नजर न आएं

    दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर शनिवार तड़के 28 जून से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस उठाकर अस्पताल ले गई.

    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि सोनम वांगचुक को पुलिस जबरन उठाकर ले गई और छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया.

    सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से ले जाते हुए कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं.

    जंतर मंतर

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    इमेज कैप्शन, सीजेपी फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने बताया, ''जब मैं यहाँ से सुबह सात बजे फ़्रेश होने के लिए निकला तभी पुलिस के लोग आए और सोनम सर को घसीटकर ले गए"
    जंतर मंतर

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    इमेज कैप्शन, जंतर मंतर पर मौजूद एक शख़्स ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''सुबह-सुबह इन लोगों ने डॉक्टर की टीम बोलकर 10 पुलिसवालों को अंदर भेजा. हम समझ गए थे कि शायद पुलिसवाले हैं क्योंकि वे डॉक्टर जैसे दिख नहीं रहे थे.''
    जंतर मंतर

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    इमेज कैप्शन, डीसीपी नई दिल्ली ने एक्स पर लिखा है, ''दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें ज़रूरी मेडिकल देखभाल के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया है''
    जंतर-मंतर

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    इमेज कैप्शन, सोनम वांगचुक 28 जून से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं. शनिवार को उनकी भूख हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर चुकी है
  11. सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने क्या कहा

    संजय सिंह और डिंपल यादव

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    इमेज कैप्शन, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी की लोकसभा सांसद डिंपल यादव (फ़ाइल फ़ोटो)

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया.

    इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया.

    मामले पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि वांगचुक की मांग सुनने की बजाय उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "ये क्या गुंडागर्दी चल रही है? मोदी जी ये सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता. जिस युवा पर लाठी चला रहे हो, यही आपका तख़्त उखाड़ेगा. एक शख़्स जो पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर है, उनकी मांगें सुनने के बजाय उनको जबरन गिरफ़्तार करके अस्पताल में भर्ती करा दिया गया."

    समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान को कुचला जा रहा है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है. भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं- यह तानाशाही है."

    शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र को जबरन तोड़ा जा रहा है और सरकार छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को भी बर्दाश्त नहीं कर रही है.

    आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कितनी शर्म की बात है! पूरी दुनिया देख रही है कि भारत में लोकतंत्र को ज़बरदस्ती और बेहयाई से तोड़ा जा रहा है. अब तो छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं किए जा रहे, सिर्फ इसलिए कि मंत्री नाकाबिल है.”

    वहीं, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.

    गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं. शनिवार को उनकी भूख हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर चुकी है.

  12. डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा को टैरिफ़ की धमकी, बोले- प्रदूषित हवा की क़ीमत वसूलेंगे

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह जानबूझकर की गई लापरवाही है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर नए टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा जंगलों की देखभाल में लापरवाही बरत रहा है, जिससे अमेरिका को प्रदूषित हवा का सामना करना पड़ रहा है.

    उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह जल्द ही कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से बात करेंगे और जवाब मांगेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि कनाडा की इस कथित लापरवाही के जवाब में नए शुल्क (टैरिफ़) लगाए जा सकते हैं.

    ट्रंप ने शुक्रवार देर रात ट्रुथ सोशल पर लिखा, "हम कनाडा को इसके लिए ज़िम्मेदार मानते हैं कि वह अपने जंगलों की सही तरीके से देखभाल नहीं कर रहा है. इसकी वजह से अमेरिका में गंदी, प्रदूषित और हानिकारक हवा आ रही है. इस हवा की क्वालिटी ख़तरनाक है और बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती. मैं आज प्रधानमंत्री से बात करूंगा और पूछूंगा कि वे इस बारे में क्या करने वाले हैं."

    उन्होंने लिखा, "यह जानबूझकर की गई लापरवाही है और अब यह हर साल होने वाली बात बनती जा रही है. इससे अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है. इस प्रदूषण की क़ीमत भी कनाडा पर अभी लगाए जा रहे टैरिफ़ में जोड़नी होगी."

    न्यूयॉर्क में प्रदूषित हवा

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    इमेज कैप्शन, कनाडा के भीषण जंगलों में लगी आग के कारण अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में धुआं छा गया

    यह बयान ऐसे समय आया है जब कनाडा में सैकड़ों जंगलों में आग लगी हुई है और उसका धुआं उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से में फैल गया है.

    शुक्रवार तक कनाडा में जंगलों में लगी आग की क़रीब 888 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें से अधिकांश पर अब भी क़ाबू नहीं पाया जा सका है. इनमें से 190 से अधिक घटनाएं केवल ओंटारियो प्रांत की हैं.

    उधर, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पहले ही कह चुके हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटना कनाडा और अमेरिका दोनों की साझा ज़िम्मेदारी है.

    वहीं, ट्रंप के बयान के बाद कनाडा के आपात प्रबंधन मंत्री ने कहा कि दोनों देश प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए लगातार संपर्क में रहते हैं और सहयोग का लंबा इतिहास साझा करते हैं.

    उन्होंने 1982 के अग्निशमन समझौते और 2025 जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुए आपदा सहयोग समझौते का भी उल्लेख किया.

  13. सोनम वांगचुक बोले- शरीर का 20 फ़ीसदी हिस्सा ख़त्म हो चुका है

    सोनम वांगचुक

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    इमेज कैप्शन, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार (18 जुलाई) को 21वें दिन में प्रवेश कर गई.

    वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं. इस बीच उन्होंने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन को लेकर बात की.

    वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि अनशन के दौरान उनके शरीर का क़रीब 20 फ़ीसदी हिस्सा ख़त्म हो चुका है, लेकिन उनका दिमाग़ अब भी पूरी तरह से काम कर रहा है.

    उन्होंने कहा, "मैं अभी भी ज़िंदा हूं. मेरे शरीर का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा चला गया है. शरीर के फ़ैट्स के बाद अब मसल्स (मांसपेशियां) भी जा चुके हैं. इसके बाद अंदरूनी ऑर्गन जाएंगे और आख़िर में दिमाग़. लेकिन अभी वो नौबत नहीं आई है. आज 20वां दिन ख़त्म हो रहा है और मैं साबित कर सकता हूं कि मेरा दिमाग़ बिल्कुल ठीक काम कर रहा है."

    "यहां बहुत से लोग पूछते हैं कि आंदोलन की वजह से क्या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा होगा या कोई जवाबदेही तय होगी? मैं आपसे पूछता हूं, भारत की जनता को अपने बच्चों की जान और शिक्षा ज़्यादा प्यारी है या प्याज़? भारत में जनता के आंदोलन की ताक़त से तीन बार सरकारें गिरी हैं. 1980 में केंद्र सरकार गिरी, 1998 में दिल्ली और राजस्थान की सरकारें गिरीं, वो आंदोलन सिर्फ़ प्याज़ की क़ीमतों को लेकर था."

    वांगचुक ने कहा कि इस बार मुद्दा प्याज़ नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और जीवन का है. उन्होंने दावा किया कि इस साल नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के कारण 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है. उन्होंने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे पर भी शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं होना चाहिए.

    उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की.

    वांगचुक ने कहा, "20 जुलाई को मेरे साथ संसद की ओर मार्च कीजिए. हमारी असली ताक़त आपकी संख्या है. मैं अकेला, भूखा और एक साधारण इंसान हूं. ताक़त आप लोगों की है. हम सिर्फ़ छात्रों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं."

    वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि वांगचुक पर हमला करने की कोशिश की गई. उनके अनुसार, वांगचुक की ओर कोई वस्तु फेंकी गई, हालांकि इस घटना में उन्हें कोई चोट नहीं लगी.

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  14. फ़ॉकलैंड बैनर विवाद: अर्जेंटीना के समर्थन में अमेरिका ने क्या कहा

    फ़ॉकलैंड से जुड़ा बैनर लिए अर्जेंटीना की टीम

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    इमेज कैप्शन, सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने फ़ॉकलैंड द्वीप से जुड़ा एक बैनर लहराया था

    फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप-2026 में फ़ॉकलैंड द्वीप से जुड़े बैनर को लेकर विवादों में घिरी अर्जेंटीना की टीम के समर्थन में अब व्हाइट हाउस उतर आया है.

    व्हाइट हाउस ने टीम के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का बचाव करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को अमेरिका में ऐसे बयान देने का अधिकार है.

    दरअसल, सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने एक बैनर लहराया था, जिसमें लिखा था कि "फ़ॉकलैंड अर्जेंटीना का है."

    इस बैनर के ज़रिए अर्जेंटीना ने फ़ॉकलैंड द्वीप पर अपने दावे को दोहराया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया.

    मामले में फ़ीफ़ा अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है. माना जा रहा है कि खिलाड़ियों का यह कदम फ़ीफ़ा के उस नियम का उल्लंघन है, जिसके तहत राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं की जा सकती है.

    पत्रकारों से बातचीत में शुक्रवार को व्हाइट हाउस फ़ीफ़ा टास्क फ़ोर्स के प्रमुख एंड्रयू जूलियानी ने कहा कि टीम को अमेरिका में "ऐसे बयान देने का मौका और अधिकार" मिला है.

    उन्होंने अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन का हवाला देते हुए कहा, "हम अमेरिका में अपने पहले संशोधन के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों पर विश्वास करते हैं."

    जूलियानी के इस बयान से विवाद और गहरा सकता है. वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय डाउनिंग स्ट्रीट ने भी फ़ीफ़ा से पूरे मामले की जांच कराने की मांग का समर्थन किया है.

    गौरतलब है कि फ़ॉकलैंड द्वीप दक्षिण-पश्चिम अटलांटिक महासागर में स्थित एक ऐसा इलाक़ा है, जिस पर ब्रिटेन का नियंत्रण है. इस द्वीप की संप्रभुता को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है.

  15. नमस्कार!

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