अमेरिका को कभी डराते रहे 'यूएनए बॉम्बर' की जेल में मौत

टेड कैज़िंस्की

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इमेज कैप्शन, टेड कैज़िंस्की को आख़िरकार साल 1996 में पकड़ लिया गया था.
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मैट मर्फ़ी

बीबीसी न्यूज़

टेड कैज़िंस्की, जिन्हें यूएनए बॉम्बर के नाम से भी जाना जाता है, जेल के सेल में मृत पाए गए हैं.

संघीय अधिकारियों ने बीबीसी से उनकी मौत की पुष्टि की है.

1978 से 1995 के बीच कैज़िंस्की ने चिट्ठियों में बम भेजकर तीन लोगों की जान ली थी और 23 को घायल किया था. बाद में अदालत में उन्होंने अपने अपराध क़ुबूल कर लिए थे.

बीस साल तक गिरफ़्तारी से बचने के बाद उन्हें साल 1996 में बिना पेरौल के आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी.

हार्वर्ड में पढ़े और प्रशिक्षित इस गणितज्ञ को बाद में मोनटाना से पकड़ा गया था.

अमेरिका के लोग दशकों तक इस व्यक्ति से प्रभावित रहे और इनके जीवन पर कई टीवी डॉक्यूमेंट्री भी बनाईं गईं.

बीते तीन दशकों के दौरान वो अमेरिका की अलग-अलग जेलों में बंद रहे. हाल ही में वो नॉर्थ कैरोलीना के फ़ेडरल मेडिकल सेंटर जेल में थे.

जेल के सुरक्षाकर्मियों को शनिवार को 12.25 बजे उनका शव मिला.

उनकी मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है.

जेल के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, “कर्मचारियों ने उनकी जान बचाने की कोशिश की. बाद में उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया था जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.”

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सेहत में गिरावट के बाद उन्हें दिसंबर 2021 में मेडिकल सेंटर लाया गया था. इससे पहले वो लंबे समय तक कोलोराडो की सुपरमैक्स जेल में बंद थे.

कैज़िंस्की के हिंसक अभियान की वजह से अमेरिका में कई लोग बुरी तरह घायल हुए थे. उन्होंने ऐसा ख़ौफ़ पैदा किया था कि अमेरिका में पत्र भेजने का तरीक़ा बदल दिया गया था.

सिबंतर 1995 में कैज़िंस्की ने न्यू यॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट को अपना लेख प्रकाशित करने के लिए मजबूर कर दिया था. इस लेख का शीर्षक था- ओद्यौगिक समाज और उसका भविष्य

कैज़िंस्की ने धमकी दी थी कि अगर राष्ट्रीय अख़बार उनके लेख को प्रकाशित करेंगे तो वो अपना हिंसक अभियान बंद कर देंगे. एफ़बीआई और अमेरिका के महाधिवक्ता की सहमति के बाद ये लेख प्रकाशित कर दिया गया था.

35000 शब्दों के अपने लेख में कैज़िंस्की ने आधुनिक जीवन की आलोचना करते हुए कहा था तकनीक की वजह से अमेरिकी लोग निशक्तता और अलगाव से पीड़ित हो रहे हैं.

लेकिन अख़बार पढ़ने के बाद कैज़िस्की के भाई और भाभी ने उनकी भाषा को पहचान लिया था और एफ़बीआई को अलर्ट किया था. एफ़बीआई उन्हें लगभग बीस सालों से खोज रही थी. ये अमेरिका के सबसे बड़े खोज अभियानों में से एक भी था.

एफ़बीआई एजेंट

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इमेज कैप्शन, 5 अप्रैल 1996 को एफ़बीआई एजेंट आख़िरकार टेड कैज़िंस्की तक पहुंच गए थे.

गिरफ़्तार होने पर कैज़िंस्की ने क्या कहा?

अप्रैल 1996 में पुलिस ने उन्हें 10 गुणा 14 फ़ुट के प्लाइवुड से बनी एक कैबिन में मोंटाना के लिंकन इलाक़े में पकड़ लिया था.

उनकी झोपड़ी में पत्रिकाएं भरी पड़ीं थीं. कोड में लिखी एक डायरी थी और दो तैयार किए हुए बम थे.

कैज़िंस्की के लेख की भाषा अत्यधिक राजनीतिक थी और इसने बहुत से लोगों को प्रभावित किया था, लेकिन उन्होंने कभी भी इस क्रांतिकारी आवरण को मूल रूप देने की मांग नहीं की. बहुत से लोगों ने इन विचारों के लिए उन्हें ही ज़िम्मेदार बताया था.

अपनी ख़ुद की डायरी में उन्होंने लिखा था कि वो नहीं मानते हैं कि वो परोपकारी नहीं है और ना ही मानवता की भलाई के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने इस बात पर अधिक ज़ोर दिया कि वो बदले की भावना से प्रेरित होकर काम कर रहे थे.

एक महिला सहकर्मी ने दो बार डेट करने के बाद कैज़िंस्की को छोड़ दिया था जिसके बाद उनके भाई ने उन्हें अपने पारिवारिक व्यवसाय से हटा दिया था. इस घटनाक्रम के कुछ दिन बाद ही कैज़िंस्की के हमले शुरू हो गए थे.

इसके बाद से वो मोंटाना के अपने ख़ुद के बनाए केबिन में रहने लगे थे. इसमें ना बिजली थी, ना पानी था और ना ही किसी तरह की और सुविधा थी.

उन्होंने सबसे पहला हमला इलेनॉय की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में किया था. दो बम हमले लगभग एक साल के अंतराल में हुए थे. पहला हमला 25 मई 1978 और दूसरा 9 मई 1979 को हुआ था. इनमें दो लोग घायल हुए थे.

इसके बाद उन्होंने ऐसा बम बनाया था जो ऊंचाई पर जाकर अपने आप फट जाता. इस बम को अमेरिकन एयरलाइन की फ्लाइट में रखा गया था. धुएं की वजह से इस घटना में 12 लोग घायल हुए थे.

कैज़िंस्की

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क्यों नाम दिया गया यूएनए बॉम्बर?

शुरुआती हमलों के बाद एफ़बीआई ने उन्हें यूएनए बॉम्बर का नाम दे दिया था क्योंकि उनके निशाने पर यूनिवर्सिटी और एयरलाइन थीं.

अगले कुछ सालों में कैज़िंस्की ने तेरह हमले और किए. इनमें तीन लोग मारे गए.

इनमें एडवर्टाइज़िंग एक्ज़ीक्यूटिव थॉमस मोसर भी थे. अदालत में सुनवाई के दौरान उनकी पत्नी ने कहा था कि हमले के दिन उन्हें अपने परिवार के साथ क्रिसमस ट्री घर लाना था.

घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा था, “वो बहुत धीरे से कराह रहे थे. उनके हाथ की उंगलियां लटकी हुईं थीं. मैंने उनका बायां हाथ पकड़ा. मैं उनसे कह रही थी बस मदद पहुंचने वाली है. मैंने उनसे कहा मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूं.”

गिरफ़्तारी के बाद से ही कैज़िंस्की के हमले करने की वजहों को लेकर कयास लगाए जाते रहे हैं.

किशोरावस्था में उनका आईक्यू टेस्ट किया गया था जिसमें उनका स्कोर 167 था. दो क्लास लांघकर वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सौलह साल की उम्र में पढ़ने पहुंचे थे.

कैज़िंस्की

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'बिगड़े हुए जीनियस'

जेल में उनका साक्षात्कार करने वाले एक मनोवैज्ञानिक ने उन्हें पैरानॉयड स्तिजोफ्रेनिक बताया था.

सैली जॉनसन ने उनके बारे में 47 पन्नों की एक रिपोर्ट में लिखा था कि उनकी विचारधार के केंद्र में ये विचार था कि परिजनों और आधुनिक समाज ने उन्हें कलंकित किया और उनका उत्पीड़न किया.

1999 में टाइम मैग्ज़ीन को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि वो किसी तरह की मानसिक बीमारी से पीड़ित नहीं है और उन्हें लगता है कि वो एक समझदार व्यक्ति हैं.

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